पंजाब में नशे के खिलाफ जारी जंग में खन्ना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने जेल के भीतर से संचालित हो रहे एक हाई-प्रोफाइल ड्रग ट्रैफिकिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड सुनील कुमार उर्फ बची (निवासी समराला) है, जो जेल में बंद होने के बावजूद मोबाइल फोन के जरिए पूरे पंजाब में हेरोइन की सप्लाई को कंट्रोल कर रहा था।
मां संभालती थी ड्रग्स की ‘तिजोरी’
जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह यह है कि सुनील कुमार का यह काला कारोबार पारिवारिक स्तर पर चल रहा था। सुनील जेल से मोबाइल के जरिए सौदे तय करता था, वहीं उसकी मां घर पर बैठकर नशे की तस्करी से होने वाली लाखों की कमाई का हिसाब-किताब रखती थी। पुलिस ने सुनील को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पूछताछ की, जिसमें उसके पास से जेल में इस्तेमाल किया जा रहा मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया गया है।
6 जनवरी की नाकाबंदी से शुरू हुआ ‘ऑपरेशन क्लीन’
इस बड़े रैकेट का खुलासा तब शुरू हुआ जब 6 जनवरी को पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान अंग्रेज सिंह (तरनतारन) और जशनप्रीत सिंह (बठिंडा) को गिरफ्तार किया। इनकी कार से 4 किलो 215 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। आरोपियों से हुई कड़ी पूछताछ के बाद पुलिस ने एक के बाद एक कड़ियां जोड़ीं और हर्षदीप सिंह, प्रभजोत सिंह सहित कुल 18 आरोपियों को इस मामले में नामजद किया।
भारी मात्रा में हथियार और कैश बरामद
पुलिस अब तक इस गैंग के 9 सदस्यों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिसिया कार्रवाई के दौरान सुनील बची और उसके साथी गुरतेज सिंह गुरी से:
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हथियार: 2 पिस्टल (.30 बोर) और मैगजीन।
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नशा: 95 ग्राम हेरोइन (सुनील से) और 100 ग्राम हेरोइन (मनप्रीत चौधरी से)।
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कैश: 2 लाख रुपये की ड्रग मनी।