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देहरादून में सायरन टेस्ट: प्रशासन ने आमजन से की अफवाह न फैलाने की अपील

देहरादून में शनिवार शाम अचानक सायरन की आवाज सुनाई दे तो घबराने या चौंकने की जरूरत नहीं है। जिला प्रशासन ने लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों के प्रति सतर्क और जागरूक करने के उद्देश्य से सायरन परीक्षण (Siren Testing Drill) करने का निर्णय लिया है।

क्यों हो रहा है सायरन परीक्षण?

देहरादून प्रशासन के अनुसार, इस तरह की ड्रिल समय-समय पर बेहद जरूरी होती है ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति – चाहे वह प्राकृतिक आपदा हो, हादसा हो या कोई अन्य आपात स्थिति – में लोग तुरंत अलर्ट हो सकें और बिना देर किए सही निर्णय ले पाएं।

आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ बताते हैं कि – “अचानक भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ जैसी परिस्थितियों में समय पर अलर्ट मिलना बेहद जरूरी है। सायरन का उद्देश्य लोगों को सतर्क करना और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना है।”

प्रशासन ने की अपील

प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि इस दौरान किसी भी प्रकार की अफवाह न फैलाएं। सायरन की आवाज केवल एक ड्रिल का हिस्सा है, इसका उद्देश्य केवल जागरूकता और सतर्कता बढ़ाना है।

जिलाधिकारी ने कहा –“लोगों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह सिर्फ एक परीक्षण है। हम चाहते हैं कि लोग सतर्क रहें और अफवाहों से दूर रहें।”

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

सायरन बजने की सूचना मिलने पर कई लोगों ने इसे एक अच्छी पहल बताया। राजपुर रोड के रहने वाले एक व्यापारी ने कहा – “अगर प्रशासन हमें पहले से अलर्ट रखने के लिए इस तरह के परीक्षण करता है तो यह बहुत अच्छी बात है। कई बार लोग आपातकाल में घबरा जाते हैं, लेकिन अगर वे पहले से अलर्ट रहने की आदत डाल लें तो जान-माल का नुकसान कम किया जा सकता है।”

वहीं, कॉलेज की एक छात्रा ने कहा – “हमने सिर्फ फिल्मों में सायरन सुना था, अब अगर असली में सुनेंगे तो कम से कम यह समझ पाएंगे कि इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।”

क्यों जरूरी है ड्रिल?

उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पहाड़ी राज्य में भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। इस वजह से समय-समय पर ऐसे परीक्षण किए जाते हैं ताकि आमजन को जागरूक किया जा सके और किसी भी अप्रत्याशित घटना के समय तेजी से प्रतिक्रिया हो सके।

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