11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान, अंकिता भंडारी मामले को लेकर बढ़ा दबाव
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में जन आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने संयुक्त रूप से 11 जनवरी को पूरे प्रदेश में उत्तराखंड बंद का आह्वान किया है। संगठनों का कहना है कि यह बंद न्याय की मांग को मजबूती से उठाने और सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
राजनीतिक दलों ने बताया कि बंद को सफल बनाने के लिए व्यापार मंडलों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से बातचीत की जाएगी और उनसे सहयोग का अनुरोध किया जाएगा। उनका मानना है कि जब तक समाज का हर वर्ग एकजुट होकर सामने नहीं आएगा, तब तक पीड़िता को न्याय दिलाना मुश्किल होगा।
सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों ने साफ शब्दों में कहा है कि यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है और आगे भी लगातार जारी रहेगा। दलों ने राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में मामले से जुड़े कथित वीआईपी लोगों को जांच के दायरे में नहीं लाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उनका कहना है कि जांच में किसी भी तरह का दबाव या पक्षपात स्वीकार नहीं किया जाएगा और कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। राजनीतिक दलों और संगठनों ने सरकार से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
न्याय की मांग को लेकर एकजुट हुए संगठन
संगठनों का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था की जिम्मेदारी का भी सवाल है। इसी वजह से प्रदेशव्यापी बंद के जरिए सरकार पर नैतिक और प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है, ताकि पीड़िता को जल्द न्याय मिल सके।