पंजाब में फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अभी से सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के फॉर्मूले पर काम कर रही है, जिसका मुख्य केंद्र पंजाब की करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी और 38 प्रतिशत हिंदू मतदाता हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का जालंधर दौरा: आस्था के जरिए सियासत?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 फरवरी को जालंधर स्थित गुरु रविदास पंथ के सबसे प्रतिष्ठित डेरे ‘सचखंड बल्लां’ पहुँच रहे हैं। वैसे तो यह एक धार्मिक कार्यक्रम है, लेकिन इसके सियासी मायने बड़े हैं। यहाँ प्रधानमंत्री आदमपुर हवाई अड्डे का नाम ‘श्री गुरु रविदास जी’ के नाम पर रखने की विधिवत घोषणा/उद्घाटन करेंगे। यह कदम सीधे तौर पर रविदासिया समाज को भाजपा के पाले में लाने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है।
आप बनाम भाजपा: पंथक मुद्दों पर घमासान
जहाँ शिरोमणि अकाली दल परंपरागत रूप से पंथक राजनीति करता रहा है, वहीं अब आम आदमी पार्टी (AAP) भी इसी राह पर है। ‘आप’ ने श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को एक साल (फरवरी 2026 से 2027) तक भव्य तरीके से मनाने की योजना बनाई है। इसके मुकाबले भाजपा अब अपने ‘कोर वोटर’ यानी हिंदुओं के साथ-साथ दलितों और जट सिखों को जोड़कर एक मजबूत गठबंधन तैयार करना चाहती है।
नेताओं की ‘घर वापसी’ और नए ऑफर
भाजपा केवल धार्मिक केंद्रों तक सीमित नहीं है। पार्टी ने कांग्रेस और शिअद के उन चेहरों को शामिल किया है जिनका जट सिख बेल्ट में प्रभाव है। भाजपा नेता केवल ढिल्लों द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भाजपा में आने का खुला निमंत्रण देना यह दर्शाता है कि पार्टी सूबे के सबसे बड़े दलित चेहरे को अपने साथ जोड़ने के लिए बेताब है