पंजाब सरकार द्वारा मोगा में आयोजित ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध-2’ अभियान के तहत जनसभा ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस कार्यक्रम के मंच पर मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ-साथ अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी और उसी मंच से पंजाब के डीजीपी व मुख्य सचिव द्वारा जनता को संबोधित किए जाने पर विपक्ष ने सरकार को घेरा है।
विपक्ष का कड़ा प्रहार: “सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग”
विपक्षी दलों ने इस आयोजन को सरकारी संसाधनों और प्रशासनिक पदों की गरिमा के उल्लंघन का मामला बताया है:
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शिरोमणि अकाली दल: प्रदेश महासचिव गुरप्रीत सिंह रालू खन्ना ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि यदि यह पार्टी की रैली थी तो शीर्ष अधिकारी वहां क्या कर रहे थे? और यदि यह सरकारी कार्यक्रम था तो जेल से बाहर आए राजनीतिक नेता मंच पर क्यों थे? उन्होंने करदाताओं के पैसे को पार्टी के प्रचार में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
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भारतीय जनता पार्टी: पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने इसे ‘नौकरशाही का राजनीतिकरण’ करार दिया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सोशल मीडिया पर टैग करते हुए सवाल उठाया कि क्या देश का ‘स्टील फ्रेम’ (प्रशासनिक ढांचा) राजनीतिक दबाव में झुक रहा है? उन्होंने इसे ‘ऑल इंडिया सर्विस रूल्स’ का उल्लंघन बताया।
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कांग्रेस: विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने प्रशासनिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से दोनों अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
‘आप’ का पलटवार: “नशे के खिलाफ कार्रवाई से घबराया विपक्ष”
आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए विपक्ष पर ही निशाना साधा है। पार्टी के स्टेट मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने कहा:
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यह विलेज डिफेंस कमेटियों का एक शपथ ग्रहण समारोह था, न कि राजनीतिक रैली।
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विपक्ष नशे के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से बौखला गया है।
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पिछली सरकारों ने नशे को संरक्षण दिया, जबकि वर्तमान सरकार प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ इसे खत्म कर रही है।
पंजाब की राजनीति में यह मामला अब दिल्ली तक पहुंचने के आसार हैं, क्योंकि विपक्ष ने इसे प्रशासनिक सेवा नियमावली के उल्लंघन का बड़ा मुद्दा बना दिया है।