उत्तराखंड में भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग लगातार रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रही है। मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी तापमान बढ़ने से लोग गर्मी से बेहाल हैं। एसी, कूलर, पंखे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल का सीधा असर प्रदेश की बिजली खपत पर दिखाई दे रहा है। ऊर्जा विभाग के अनुसार इस साल बिजली की मांग तेजी से तीन साल पुराने रिकॉर्ड के करीब पहुंचती जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि घरों में तेजी से बढ़ रहे इंडक्शन चूल्हों के उपयोग ने भी बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है।
यूपीसीएल अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में इंडक्शन चूल्हों के बढ़ते इस्तेमाल से करीब 100 मेगावाट अतिरिक्त बिजली भार बढ़ा है। पहले जहां अधिकांश घरों में खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर का उपयोग होता था, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन की ओर रुख कर रहे हैं। इससे बिजली खपत में अचानक तेजी आई है। आंकड़ों के अनुसार एक मई को प्रदेश में बिजली की मांग लगभग 4 करोड़ यूनिट थी, जो अब बढ़कर करीब 6 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है। गौरतलब है कि तीन साल पहले उत्तराखंड में बिजली की अधिकतम मांग 6.6 करोड़ यूनिट दर्ज की गई थी। ऐसे में इस बार पुराने रिकॉर्ड के टूटने की संभावना जताई जा रही है।
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के प्रबंध निदेशक जीएस बुडियाल ने बताया कि फिलहाल प्रदेश में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है और कहीं भी घोषित या अघोषित कटौती नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि गर्मियों को देखते हुए विभाग ने अप्रैल महीने में ही तैयारियां पूरी कर ली थीं। उन्होंने बताया कि बढ़ती मांग को देखते हुए जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बिजली खुले बाजार से खरीदी जाएगी। इसके अलावा काशीपुर स्थित गैस आधारित ऊर्जा परियोजना “गामा” से जल्द ही लगभग 75 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने लगेगी, जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
यूपीसीएल के निदेशक परिचालन एमआर आर्या ने बताया कि बिजली की मांग और आपूर्ति पर हर 15 मिनट में नजर रखी जा रही है। निगम के आधुनिक सॉफ्टवेयर में केंद्रीय पूल, राज्य पूल और सोलर ऊर्जा उत्पादन से जुड़ी जानकारी लगातार अपडेट होती रहती है, जिससे बिजली प्रबंधन में काफी मदद मिल रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गर्मी का असर इसी तरह बना रहा तो आने वाले दिनों में बिजली की मांग और बढ़ सकती है। ऐसे में यूपीसीएल के सामने निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। हालांकि विभाग का दावा है कि फिलहाल प्रदेश में बिजली संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है और सभी आवश्यक इंतजाम पहले से कर लिए गए हैं।