हरियाणा के हांसी क्षेत्र के चानौत गांव में पेयजल आपूर्ति को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर उग्र रूप लेता नजर आया। सोमवार को प्रशासन की ओर से हांसी शहर को पानी उपलब्ध कराने के लिए 36 इंची मुख्य पेयजल पाइपलाइन को दोबारा बिछाने का कार्य शुरू किया गया, लेकिन इसकी सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस तथा ग्रामीण आमने-सामने आ गए।
ग्रामीणों के बढ़ते विरोध और माहौल की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को फिलहाल पाइपलाइन बिछाने का कार्य रोकना पड़ा। मौके पर मौजूद डीएसपी रविंद्र सांगवान ने हालात को देखते हुए पुलिस बल को पीछे हटने के निर्देश दिए। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। पाइपलाइन कार्य की निगरानी के लिए बिजली निगम के एसडीओ मोहनलाल को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है, जबकि अन्य जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि चानौत गांव लंबे समय से पेयजल संकट झेल रहा है। उनका आरोप है कि गांव की जरूरतों को नजरअंदाज कर हांसी शहर के लिए पाइपलाइन बिछाई जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि 36 इंची पाइपलाइन में टी (कनेक्शन) लगाकर गांव को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि यदि तकनीकी कारणों से ऐसा संभव नहीं है तो पाइपलाइन का आकार बढ़ाकर 42 इंच किया जाए, ताकि गांव और शहर दोनों की जरूरतें पूरी हो सकें।
मौके पर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि जब तक गांव के लिए स्थायी और पर्याप्त पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक वे पाइपलाइन को दोबारा नहीं बिछाने देंगे।
प्रशासन की ओर से गांव के लिए भाखड़ा नहर से करीब आठ किलोमीटर लंबी अलग पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन ग्रामीण इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा और वे 36 इंची मुख्य पाइपलाइन से ही पानी लेने के पक्ष में हैं।
गौरतलब है कि चानौत गांव में पिछले कई सप्ताह से इस मुद्दे को लेकर आंदोलन चल रहा है। गांव में पिछले 39 दिनों से धरना जारी है। इससे पहले ग्रामीणों ने हांसी शहर के लिए बिछाई जा रही 36 इंची पाइपलाइन को उखाड़ दिया था, जिसके बाद कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब ग्रामीणों ने प्रशासन की सहमति मिलने का दावा करते हुए पाइपलाइन में टी लगा दी और इसे अपनी जीत बताते हुए जश्न मनाया। इसके बाद आमरण अनशन भी समाप्त कर दिया गया था। हालांकि अगले ही दिन जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि टी लगाने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद देर रात भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पाइपलाइन से लगाए गए टी कनेक्शन को हटा दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। मामले में पुलिस ने छह नामजद व्यक्तियों सहित करीब 1500 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
फिलहाल गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण विवाद के जल्द समाधान की संभावना कम दिखाई दे रही है। वहीं प्रशासन शांति बनाए रखने और कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।