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भगवान परशुराम जयंती कार्यक्रम में गरजे नवीन जयहिंद, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

हरियाणा के भिवानी जिले में मनीषा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सोमवार को एक बार फिर माहौल तनावपूर्ण हो गया। गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी मनीषा के पिता संजय लघु सचिवालय के बाहर आमरण अनशन शुरू करने के लिए अपने समर्थकों के साथ भिवानी रवाना हुए थे, लेकिन उनका काफिला गांव कुडलवास के पास ही पुलिस ने रोक दिया। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से ही इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था। पुलिस द्वारा आगे जाने से रोके जाने के बाद संजय अपने समर्थकों और ग्रामीणों के साथ मौके पर ही धरने पर बैठ गए।

कुडलवास में धरना शुरू होने की सूचना मिलते ही भिवानी में भी विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। मनीषा के दादा रामकिशन ने भी अपने परिवार और समर्थकों के साथ भिवानी में धरना शुरू कर दिया। इससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को भी मौके पर बुला लिया गया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

धरने से पहले मनीषा के पिता संजय ने साफ चेतावनी दी थी कि यदि उन्हें भिवानी जाकर आमरण अनशन करने से रोका गया तो वे दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे पर ही धरना देकर बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि इस कारण यातायात बाधित होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी। संजय का कहना है कि वह अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं और बिना अपनी मांग पूरी हुए पीछे नहीं हटेंगे।

गौरतलब है कि संजय ने 29 जून को ही जिला प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए सूचित किया था कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह 30 जून से भिवानी के लघु सचिवालय के बाहर आमरण अनशन शुरू करेंगे। इसी सूचना के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया था और संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए कुडलवास सहित आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

जब संजय अपने समर्थकों के साथ कुडलवास पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी एकत्र हो गए और धरने में शामिल हो गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का दौर जारी है, लेकिन फिलहाल कोई समाधान नहीं निकल सका है। संजय अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि उन्हें हर हाल में आमरण अनशन करने दिया जाए।

प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। वहीं प्रदर्शनकारी लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। फिलहाल कुडलवास में पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं तथा पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।

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