हरियाणा के गांव चानौत में शहर के लिए लाई जा रही भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन से टी-कनेक्शन की मांग को लेकर पिछले 46 दिनों से ग्रामीणों का आंदोलन लगातार जारी है। मंगलवार को प्रस्तावित महापंचायत से ठीक पहले प्रशासन ने आंदोलन से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कई फेसबुक, इंस्टाग्राम अकाउंट और सोशल मीडिया चैनलों को भारत में ब्लॉक कर दिया। इस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारियों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है और मामला अब और अधिक चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने आंदोलन से जुड़े करीब 10 फेसबुक अकाउंट और 20 से अधिक सोशल मीडिया चैनलों पर प्रतिबंध लगाया है। जिन लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट प्रभावित हुए हैं, उनमें किसान नेता सुरेश कौथ, हर्फ छिक्कारा, धरना समिति के सदस्य अनूप चानौत, सरपंच प्रतिनिधि हिमांशु, सुखराम, दीपक दूहन और योगेश दूहन समेत कई अन्य लोगों के फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट शामिल बताए जा रहे हैं। इन अकाउंट्स के बंद होने के बाद आंदोलनकारी इसे अपनी आवाज दबाने की कोशिश बता रहे हैं।
धरना समिति के सदस्य अनूप चानौत ने आरोप लगाया कि उनका और गांव के कई साथियों का सोशल मीडिया पूरी तरह भारत में बैन कर दिया गया है। उनका कहना है कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है और आंदोलन की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन चाहे जितनी भी सख्ती कर ले, ग्रामीण अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका दावा है कि गांव को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि वे शहर के लिए लाई जा रही भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन से अपने गांव के लिए टी-कनेक्शन चाहते हैं, ताकि गांव के लोगों को भी पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल मिल सके। इसी मांग को लेकर पिछले डेढ़ महीने से धरना लगातार जारी है और अब आंदोलन निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।
बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह आंदोलनकारी ग्रामीणों की हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ वार्ता भी हुई थी। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने गांव के लिए खरकड़ी हेड से अलग पाइपलाइन बिछाने का आश्वासन दिया था। हालांकि ग्रामीण इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुए और बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद प्रशासन और धरना समिति के बीच कोई नई वार्ता नहीं हुई।
इसी बीच मंगलवार को बुलाई गई महापंचायत को आंदोलन का अहम पड़ाव माना जा रहा है। महापंचायत में विभिन्न खाप पंचायतों, किसान संगठनों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। आंदोलनकारी इस बैठक में आगे की रणनीति और आंदोलन को तेज करने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। वहीं प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।