उत्तरकाशी में भूकंप के तेज झटके, घरों से बाहर निकले लोग

उत्तराखंड में देर रात दो अलग-अलग स्थानों पर भूकंप के झटके महसूस किए जाने से लोगों में दहशत फैल गई। उत्तरकाशी में भूकंप की तीव्रता 4.2 दर्ज की गई, जबकि टिहरी में 2.0 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। उत्तरकाशी में भूकंप के झटके रात करीब 1:21 बजे महसूस हुए। अचानक धरती हिलने से कई लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। देर रात का समय होने के कारण कुछ देर के लिए लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। उत्तरकाशी में भूकंप का असर जिले के कई इलाकों में देखने को मिला। बड़कोट, पुरोला, मोरी, चिन्यालीसौड़ और डुंडा समेत यमुना घाटी के कई क्षेत्रों में लोगों ने झटके महसूस किए। इसके अलावा गंगा घाटी के भटवाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में भी कंपन महसूस होने की जानकारी सामने आई। कई लोगों ने बताया कि झटका महसूस होते ही घरों में रखे सामान और दरवाजे-खिड़कियां हिलने लगीं, जिसके बाद लोग सुरक्षा के लिहाज से खुले स्थानों की ओर चले गए।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उत्तरकाशी में आए भूकंप का केंद्र राजगढ़ी क्षेत्र के आसपास बताया गया है। भूकंप की तीव्रता 4.2 होने के कारण इसका असर आसपास के कई इलाकों में महसूस किया गया। वहीं टिहरी में 2.0 तीव्रता के हल्के झटके महसूस हुए। दोनों घटनाओं के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील राज्य माना जाता है और उत्तरकाशी, टिहरी समेत पर्वतीय क्षेत्रों में समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस होते रहे हैं। ऐसे में देर रात आए इन झटकों ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी। प्रशासन की ओर से लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की जाती है।

उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस होने के बाद स्थानीय स्तर पर लोग एक-दूसरे से जानकारी लेते नजर आए। रात के समय कई परिवार कुछ देर तक घरों से बाहर रहे। हालांकि, भूकंप के बाद किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की टीमें संभावित स्थिति पर नजर रख रही हैं और प्रभावित क्षेत्रों से लगातार जानकारी जुटाई जा रही है। भूकंप के लिहाज से संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ लगातार लोगों को जागरूक रहने की सलाह देते हैं। भूकंप आने की स्थिति में घबराकर भागने के बजाय मजबूत स्थान पर रहना, सिर को सुरक्षित रखना और झटके रुकने के बाद ही खुले क्षेत्र में निकलना जरूरी माना जाता है। उत्तरकाशी और टिहरी में आए इन झटकों के बाद भी प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने की तैयारी बनाए रखना है।

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