उत्तराखंड में बड़ा सियासी फेरबदल, श्रीनगर की मेयर आरती भंडारी ने थामा भाजपा का दामन

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में बुधवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। श्रीनगर की निर्दलीय मेयर आरती भंडारी समेत 10 पार्षद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मेयर के भाजपा में शामिल होने को लेकर कहा कि इससे कांग्रेस को कोई नुकसान नहीं हुआ है।  गोदियाल ने कहा कि आरती भंडारी पहले भी भाजपा से जुड़ी रही हैं और अब वह भाजपा में वापस गई हैं। वहीं, उन्होंने उनके साथ पार्टी में शामिल हुए 10 पार्षदों के फैसले पर सवाल खड़े किए।

गणेश गोदियाल बोले- कांग्रेस को कोई फर्क नहीं

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि श्रीनगर मेयर आरती भंडारी के भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि आरती पहले से ही भाजपा की विचारधारा से जुड़ी रही हैं।  हालांकि, गोदियाल ने 10 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इनमें अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े पार्षद भी शामिल हैं और उन्हें भाजपा में जाने से पहले मौजूदा परिस्थितियों और हालिया घटनाक्रम पर विचार करना चाहिए था।

हल्द्वानी के कथित ‘मंच शुद्धीकरण’ विवाद का किया जिक्र

गणेश गोदियाल ने हाल ही में हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर मंच का शुद्धीकरण किए जाने से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया।  उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले पार्षदों को भाजपा में शामिल होने से पहले इस घटना को लेकर विचार करना चाहिए था। गोदियाल के मुताबिक, जब दलित समाज और आम लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर नाराजगी है, तब जनप्रतिनिधियों को समाजहित को प्राथमिकता देनी चाहिए।  उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल करने वाले कुछ जनप्रतिनिधियों ने अब अपने राजनीतिक हित को प्राथमिकता देते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है।

श्रीनगर की राजनीति में बदल सकते हैं समीकरण

मेयर आरती भंडारी और 10 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद श्रीनगर की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदलने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आगामी चुनावों को देखते हुए भी इस राजनीतिक बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  खड़गे की रैली में नारेबाजी के आरोपों को बताया बेबुनियाद

इधर, हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के दौरान कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के आरोपों को भी गणेश गोदियाल ने खारिज किया।  गोदियाल ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि ऐसे नारे लगाए गए थे तो इसका प्रमाण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए मुख्यमंत्री के बयान पर भी सवाल उठाए।  श्रीनगर में मेयर और 10 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।

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