Deprecated: Function WP_Dependencies->add_data() was called with an argument that is deprecated since version 6.9.0! IE conditional comments are ignored by all supported browsers. in /home/u141101890/domains/alam-e-tasveer.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6260

100 साल पुराने बाबा बालक नाथ मंदिर पर विवाद गहराया, संत समाज ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

गांव आदमपुर झाड़सा में करीब 100 साल पुराने बाबा बालक नाथ मंदिर को तोड़े जाने का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मंदिर कार्रवाई के विरोध में अब संत समाज और स्थानीय ग्रामीण खुलकर सामने आ गए हैं। सोमवार को संत समाज और ग्रामीणों ने गुरुग्राम स्थित डीसी कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान जिला बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए एडीसी सोनू भट को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए सरकार और प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। संत समाज ने कहा कि इस अवधि में उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो शहर में चक्का जाम किया जाएगा। संत समाज का कहना है कि प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। संतों और ग्रामीणों ने रविवार को आदमपुर झाड़सा में हुई पंचायत के फैसले से भी प्रशासन को अवगत कराया। उन्होंने मांग की कि सरकार से बातचीत कर पंचायत को सकारात्मक जवाब दिया जाए और मंदिर तोड़ने की कार्रवाई में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

संत समाज ने मंदिर के महंत और उनके चेलों के खिलाफ दर्ज मामलों को भी रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि निर्दोष लोगों को मामले में फंसाया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए लंबे समय से श्रद्धालुओं और आम लोगों से चंदा जुटाया गया था। उनके मुताबिक मंदिर में लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई थी और प्रशासन ने कथित तौर पर बिना उचित कार्रवाई के मंदिर को तोड़ दिया। संत समाज ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में नाथ संप्रदाय से जुड़े करीब 40 संतों की समाधियां थीं। मंदिर तोड़ने के दौरान इन समाधियों को भी नुकसान पहुंचा और उनकी स्थिति को लेकर संत समाज में गहरा आक्रोश है। संतों ने मांग की कि मंदिर तोड़ने के बाद जो मलबा प्रशासन की ओर से एकत्र किया जा रहा है, उसे वापस किया जाए। इसके साथ ही मंदिर को उसके मूल स्वरूप में दोबारा स्थापित करने की मांग भी उठाई गई है। संत समाज ने कहा कि यह केवल एक मंदिर का मामला नहीं है, बल्कि इससे धार्मिक आस्था और संत समाज की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। उनका आरोप है कि कार्रवाई से संत समाज बेहद आहत है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक कई जिलों और दूसरे राज्यों से संत समाज के लोगों ने उनसे संपर्क किया है। वे गुरुग्राम पहुंचकर आंदोलन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि फिलहाल उन्हें रोका गया है और प्रशासन को बातचीत का मौका दिया गया है।

संतों ने साफ चेतावनी दी कि अगर दो दिन के भीतर प्रशासन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं हुई तो दूसरे राज्यों और जिलों से भी संतों को बुलाकर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने मंदिर तोड़ने वाले अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग भी रखी है। वहीं, एडीसी सोनू भट ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि उनका ज्ञापन जिला उपायुक्त और मुख्यमंत्री हरियाणा तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से आगे रखेगा। एडीसी ने यह भी प्रयास करने की बात कही कि संत समाज के प्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री के बीच आमने-सामने बैठक हो सके, ताकि मामले का कोई सकारात्मक समाधान निकाला जा सके। बताया जा रहा है कि करीब तीन दिन पहले हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अधिकारियों ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बाबा बालक नाथ मंदिर को गिराने की कार्रवाई की थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि मंदिर काफी पुराना था और करीब 100 वर्षों से यहां धार्मिक गतिविधियां चल रही थीं। मंदिर कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों ने कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका आरोप है कि मंदिर परिसर में मौजूद 40 से अधिक प्रतिमाएं कार्रवाई के बाद मौके से गायब हैं। इसको लेकर भी संत समाज और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

ग्रामीणों के मुताबिक मंदिर के महंत और उनके कुछ चेलों को पुलिस अपने साथ ले गई थी। इसके बाद दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजे जाने की बात भी सामने आई है। मंदिर परिसर में बंधी करीब 35 गायों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस मंदिर से जुड़ी दान राशि, सोना-चांदी और अन्य सामान भी अपने साथ ले गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के मूल स्थान पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ता बंद कर रखा है, जिससे श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में और ज्यादा नाराजगी बढ़ रही है। फिलहाल प्रशासन की ओर से ज्ञापन लेकर समाधान की कोशिश का आश्वासन दिया गया है। अब संत समाज और ग्रामीणों की नजर अगले दो दिनों में सरकार और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर है। अगर मांगों पर सहमति नहीं बनी तो यह विवाद बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *