पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने डेरा ब्यास प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोलकर राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की जेल से रिहाई और डेरा प्रमुख की उनसे मुलाकात को जोड़ते हुए सीएम मान ने न्यायपालिका और डेरे के रिश्तों पर तीखी टिप्पणी की है।
CM मान का वो पोस्ट, जिससे मचा बवाल
मुख्यमंत्री ने अपने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर पंजाबी में लिखा:
“कल बण जाण, भावें अज्ज बण जाण, अदालतां दा ओथे रब राखा, जित्थे मुलाकाती ही जज बण जाण।” > (अनुवाद: कल बन जाएं या बेशक आज बन जाएं, उन अदालतों का भगवान ही मालिक है जहां मुलाकात करने वाले ही खुद जज बन जाएं।)
विवाद की जड़: मजीठिया से मुलाकात और तुरंत जमानत
इस पूरे विवाद के पीछे की कड़ियाँ कल नाभा जेल में हुई एक मुलाकात से जुड़ी हैं:
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मुलाकात: डेरा ब्यास प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों कल जेल में बंद अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से मिलने पहुंचे थे। मजीठिया डेरा प्रमुख के नजदीकी रिश्तेदार हैं।
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डेरा प्रमुख का बयान: मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए बाबा ढिल्लों ने मजीठिया पर लगे आरोपों को झूठा करार दिया।
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संयोग या कुछ और: इस मुलाकात के ठीक एक घंटे बाद सुप्रीम कोर्ट ने बिक्रम मजीठिया को जमानत दे दी, जिससे 7 महीने बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
सियासी वार-पलटवार: BJP और अकाली दल हमलावर
डेरा ब्यास के करोड़ों अनुयायियों को देखते हुए विपक्ष ने इसे ‘आस्था पर चोट’ करार दिया है।
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भाजपा (प्रितपाल सिंह बलियावाल): उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि “अति का खुदा से वैर होता है।” उन्होंने सीएम को घेरा कि अब वे ‘रबी रूहों’ (आध्यात्मिक गुरुओं) का भी मजाक उड़ाने लगे हैं।
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अकाली दल (अर्शदीप सिंह कलेर): अकाली प्रवक्ता ने इसे संविधान और पवित्र संस्थाओं को चुनौती देने वाला ‘दुखद’ बयान बताया।