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FD फेल, सोना सुपरहिट! क्या 2050 की शादियों में ₹1 करोड़ में मिलेगा सिर्फ 2.5 तोला सोना?

महंगाई की रेस में सबसे आगे सोना

अक्सर हम बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करके निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन क्या वह महंगाई को मात दे पा रहा है? वर्तमान में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,43,760 और 22 कैरेट की ₹1,31,790 के पार जा चुकी है। यह केवल एक संख्या नहीं, बल्कि रुपए की घटती क्रय शक्ति (Purchasing Power) का संकेत है।

FD vs Gold: कौन है बेहतर विकल्प?

आसान भाषा में समझें तो पिछले कुछ दशकों में सोने ने जो रिटर्न दिया है, वह पारंपरिक FD की तुलना में कहीं अधिक है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
  • रुपए का अवमूल्यन: वैश्विक बाजार में रुपए की वैल्यू कम होने से घरेलू बाजार में सोना महंगा होता है।
  • Safe Haven Assets: युद्ध, वैश्विक तनाव या आर्थिक मंदी के समय दुनिया भर के केंद्रीय बैंक और निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित मानते हैं।
  • डिमांड और सप्लाई: केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की भारी खरीदारी इसकी कीमतों को लगातार ऊपर धकेल रही है।

ऐतिहासिक सफर: ₹4 हजार से ₹1.4 लाख तक

सोने की ग्रोथ रेट को समझना हो तो इन आंकड़ों पर गौर करें:
  • साल 2000: ₹4,400 प्रति 10 ग्राम।
  • साल 2020: ₹50,000 प्रति 10 ग्राम।
  • आज (2026): ₹1,40,000+ प्रति 10 ग्राम।
बीते 30 सालों में सोने ने औसतन 10.83% CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) दी है, जबकि पिछले 5-6 वर्षों में यह दर बढ़कर 14.6% तक पहुँच गई है।

भविष्य का अनुमान: 2050 की डरावनी तस्वीर?

अगर सोने की कीमतें मौजूदा 14.6% CAGR की रफ्तार से बढ़ती रहीं, तो साल 2050 तक के आंकड़े किसी को भी चौंका सकते हैं:
  • 10 ग्राम सोने की कीमत: लगभग ₹40 लाख
  • 1 करोड़ की वैल्यू: उस समय ₹1 करोड़ की वैल्यू इतनी कम हो जाएगी कि आप उसमें केवल 25 ग्राम (करीब 2.5 तोला) सोना ही खरीद पाएंगे।

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