Deprecated: Function WP_Dependencies->add_data() was called with an argument that is deprecated since version 6.9.0! IE conditional comments are ignored by all supported browsers. in /home/u141101890/domains/alam-e-tasveer.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6131

पंजाब ‘जाम’: यूरिया संकट, MSP और कर्ज माफी के लिए सड़कों पर उतरे हजारों किसान-मजदूर।

पंजाब में आज सत्ता की सरगर्मी तेज है। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के आह्वान पर पूरे प्रदेश में राज्यव्यापी धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया है। किसान और मजदूर अपनी अधूरी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान, छह कैबिनेट मंत्रियों और 21 विधायकों के आवासों का घेराव कर रहे हैं। इस आंदोलन ने एक बार फिर सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।

मुआवजे और MSP की मांग पर आर-पार

KMM के दिग्गज नेता सरवन सिंह पंधेर और सतनाम सिंह पन्नू ने स्पष्ट किया है कि शंभू और खनौरी आंदोलनों के दौरान हुए नुकसान की भरपाई अब तक नहीं हुई है। मोर्चे की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  • आर्थिक मुआवजा: आंदोलन के दौरान हुए नुकसान के लिए 3.77 करोड़ रुपये की तत्काल अदायगी।

  • MSP की कानूनी गारंटी: फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा देना।

  • कर्ज माफी: किसानों और मजदूरों के कर्ज पर पूरी तरह से लकीर खींचना।

‘शहीद’ परिवारों को न्याय और अधिकारियों पर एक्शन

मोर्चे ने आरोप लगाया है कि आंदोलन के दौरान किसानों पर अत्याचार किए गए और उनके सामान की चोरी हुई। पंधेर ने मांग की है कि इसमें शामिल दोषी अधिकारियों पर FIR दर्ज हो। साथ ही, घायल किसानों और शहीद परिवारों को बकाया मुआवजा और सरकारी नौकरी देने का वादा तुरंत पूरा किया जाए।

बाढ़, खाद संकट और स्मार्ट मीटर: बहुआयामी घेराव

किसान संगठनों ने केवल कृषि कानूनों ही नहीं, बल्कि आम जनता से जुड़े मुद्दों पर भी मोर्चा खोला है:

  1. खाद संकट: यूरिया और डीएपी की किल्लत और उसकी कालाबाजारी पर रोक।

  2. स्मार्ट मीटर: जबरन लगाए जा रहे प्री-पेड/स्मार्ट मीटरों पर तत्काल रोक।

  3. बिजली व बीज अधिनियम: ‘बिजली संशोधन बिल 2025’ और ‘बीज अधिनियम 2025’ के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग।

  4. पराली और जुर्माना: पराली जलाने के मामलों में किसानों पर लगाए गए जुर्माने और दर्ज केस वापस लेना।

नशे के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की मांग

हैरानी की बात यह है कि इस बार किसानों ने नशे के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया है। मोर्चे ने राजनीतिक संरक्षण प्राप्त नशा माफियाओं और सीमा पार से हो रही ड्रोन तस्करी पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्रीय बजट को ‘कॉरपोरेट का सगा’ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *