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UCPL ठेका बिना टेंडर प्रक्रिया के एक ही कंपनी को देने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी।

देहरादून, 2025 – उत्तराखंड हाईकोर्ट ने क्रिकेट प्रेमियों और राज्य के खेल व्यवस्था के लिए बड़ा कदम उठाते हुए उत्तराखंड क्रिकेट प्रीमियर लीग (UCPL) के ठेका विवाद पर नोटिस जारी किया है। अदालत ने बीसीसीआई और उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड से इस मामले में जवाब तलब किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि खिलाड़ियों के लिए मिले 22 करोड़ रुपये का उपयोग ठीक तरह से नहीं किया गया और लीग से संभावित आय को अनियमित रूप से माफ किया गया।

पूर्व उपाध्यक्ष की याचिका में आरोप
उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष सुरेंद्र भंडारी ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए बताया कि बोर्ड को 2019 से BCCI द्वारा खिलाड़ियों और लीग संचालन के लिए 22 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि दी गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि इस राशि का उपयोग खिलाड़ियों की बुनियादी सुविधाओं में नहीं हुआ। उदाहरण के तौर पर खिलाड़ियों को पौष्टिक आहार प्रदान करने के बजाए केवल केले दिए गए। साथ ही, आगामी 23 सितंबर से शुरू होने जा रही UCPL का ठेका बिना सार्वजनिक टेंडर प्रक्रिया के केवल एक ही कंपनी को दिया गया। याचिका में कहा गया कि नियमों के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति केवल एक टेंडर में भाग ले सकता है, लेकिन बोर्ड ने इसे दरकिनार किया। इस प्रक्रिया से लगभग दो करोड़ रुपये की संभावित आय से बोर्ड वंचित रहा। इसके अलावा, मैचों के दौरान फ्रेंचाइजी कंपनियों से लिए जाने वाले विज्ञापन शुल्क को भी माफ कर दिया गया, जिससे बोर्ड को अतिरिक्त वित्तीय नुकसान हुआ।

कोर्ट की कार्रवाई
नैनीताल हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए BCCI और उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड को नोटिस जारी किया। अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब तलब किया और कहा कि बोर्ड की वित्तीय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

खिलाड़ियों और खेल समुदाय के लिए महत्व
इस मामले ने न केवल क्रिकेट बोर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया है बल्कि खिलाड़ियों और खेल समुदाय में भी असंतोष पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खेल संचालन और निधि प्रबंधन में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो इससे भविष्य की लीग और युवा खिलाड़ियों के लिए अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

अगले कदम
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच और जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खेल प्रेमियों की निगाहें अब इस मामले की निष्पक्ष जांच पर टिकी हुई हैं। खिलाड़ियों के हित और लीग की पारदर्शिता बनाए रखना बोर्ड के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। उत्तराखंड क्रिकेट प्रेमियों और खेल समुदाय के लिए यह मामला एक चेतावनी है कि खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता का भी प्रतीक होना चाहिए।

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