संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बुधवार को पंजाब सहित देश के कई हिस्सों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान लुधियाना के लाडोवाल टोल प्लाजा को आम लोगों के लिए निशुल्क कर दिया गया। बड़ी संख्या में किसान संगठनों के कार्यकर्ता टोल प्लाजा पर पहुंचे और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि उनका आंदोलन आम जनता के हितों और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए है। संगरूर जिले में भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के नेतृत्व में कालाझाड़ टोल प्लाजा पर भी प्रदर्शन किया गया। किसानों ने टोल को पूरी तरह फ्री कराते हुए केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ धरना दिया। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे देश की कृषि व्यवस्था और किसानों के हितों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
धरने को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने कृषि से जुड़े विवादित समझौतों और नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया तो इसका सीधा असर छोटे किसानों, व्यापारियों और मजदूर वर्ग पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि ऐसे फैसलों से कृषि क्षेत्र कमजोर होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि फिलहाल टोल फ्री आंदोलन केवल एक सांकेतिक चेतावनी है। यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में इससे बड़ा और व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान संगठन अपने अधिकारों और कृषि हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी का भी विरोध किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि यह नीति किसानों की जमीनों के हितों के खिलाफ है और इसे दोबारा लागू करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि पहले भी जनता के विरोध के चलते इस नीति को वापस लेना पड़ा था और यदि इसे फिर लागू करने का प्रयास हुआ तो किसान इसका पुरजोर विरोध करेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि वे किसी भी ऐसी नीति को स्वीकार नहीं करेंगे, जिसे वे किसानों के हितों के विपरीत मानते हैं। उन्होंने सरकारों से किसानों के साथ संवाद बढ़ाने और कृषि से जुड़े फैसले लेने से पहले सभी पक्षों की राय को महत्व देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।