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थिएटर से उतरने के बाद फिर लौटी ‘हनुमान अंश’, वर्ड ऑफ माउथ ने बना दिया 100 करोड़ी

नीम करौली बाबा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त चर्चा में है। फिल्म ने रिलीज के 30वें दिन 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई करने का दावा किया गया है। खास बात यह है कि फिल्म की शुरुआत इतनी मजबूत नहीं थी। शुरुआती 20 दिनों में फिल्म ने करीब 12 करोड़ रुपये ही कमाए थे। इसके बाद फिल्म की कमाई में अचानक तेजी आई। अगले 10 दिनों में फिल्म ने करीब 88 करोड़ रुपये कमाए और 30 दिनों के भीतर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया। फिल्म की इस सफलता को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि एक समय यह कई सिनेमाघरों से उतर चुकी थी। इसके बावजूद दर्शकों के बीच चर्चा और सोशल मीडिया पर प्रचार ने फिल्म को दोबारा रफ्तार दे दी।

निर्माता अनुप्रिया नागर के मुताबिक, फिल्म को दर्शकों के बीच मिली प्रतिक्रिया और वर्ड ऑफ माउथ पब्लिसिटी ने पूरी तस्वीर बदल दी। शुरुआती दौर में फिल्म को लेकर निराशा के बावजूद बाद में दर्शकों का समर्थन लगातार बढ़ता गया। अनुप्रिया नागर ने अलग-अलग इंटरव्यू में बताया है कि उन्होंने कभी फिल्म बनाने के बारे में नहीं सोचा था। वह अर्थशास्त्र की छात्रा थीं और फिल्म निर्माण उनके करियर प्लान का हिस्सा नहीं था।

लेकिन नीम करौली बाबा से जुड़ी एक कहानी ने उनकी सोच बदल दी। उन्हें एक विदेशी लेख के जरिए इस भारतीय संत और उनके प्रभाव के बारे में जानकारी मिली।

अनुप्रिया के मुताबिक, यह बात उन्हें हैरान करने वाली लगी कि एक भारतीय संत के बारे में उन्हें किसी विदेशी स्रोत से जानकारी मिल रही थी। इसके बाद उन्होंने नीम करौली बाबा और उनसे जुड़ी कहानियों पर रिसर्च शुरू की।

इसी रिसर्च के दौरान उनका ध्यान स्टीव जॉब्स और नीम करौली बाबा के कनेक्शन की ओर गया। यही कहानी आगे चलकर फिल्म बनाने की प्रेरणा बनी।

बताया गया है कि ‘हनुमान अंश’ का निर्माण बेहद सीमित बजट में किया गया। अनुप्रिया के अनुसार, फिल्म का बजट 2 करोड़ रुपये से भी कम था।

फिल्म की सफलता के बाद अनुप्रिया ने कहा कि वह इस कमाई को लेकर बेहद खुश हैं, लेकिन इतनी बड़ी रकम उनके लिए खुद भी आश्चर्य की बात है। उन्होंने यह भी इच्छा जताई है कि फिल्म से होने वाले मुनाफे का इस्तेमाल जरूरतमंद बच्चों की मदद और दान के काम में किया जाए।

अनुप्रिया ने यह भी बताया कि फिल्म के निर्माण में तीन मुख्य निर्माता और सह-निर्माता शामिल रहे। उनके अनुसार, नीम करौली बाबा के आशीर्वाद से फिल्म के रास्ते में आने वाली कई मुश्किलें दूर होती गईं।

जब अनुप्रिया ने पहली बार अपने पिता को फिल्म बनाने की बात बताई तो वह भी हैरान रह गए थे। हालांकि, जब उन्हें पता चला कि फिल्म का विषय नीम करौली बाबा हैं तो उन्होंने बेटी के फैसले का समर्थन किया।

स्टीव जॉब्स और नीम करौली बाबा का कनेक्शन

नीम करौली बाबा और स्टीव जॉब्स की कहानी लंबे समय से चर्चा में रही है। Apple के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स 1974 में भारत आए थे। उनके भारत आने का उद्देश्य आध्यात्मिक अनुभव हासिल करना और जीवन के गहरे अर्थ को समझना बताया जाता है। वह अपने कॉलेज मित्र डैन कोटके के साथ भारत पहुंचे थे। उस समय जॉब्स की रुचि पूर्वी अध्यात्म और आत्मज्ञान में बढ़ रही थी। उन्होंने राम दास की किताब ‘Be Here Now’ पढ़ी थी, जिसने उन्हें भारत और नीम करौली बाबा के आश्रम की ओर आकर्षित किया। जॉब्स और डैन कोटके उत्तराखंड स्थित कैंची धाम पहुंचना चाहते थे। लेकिन जब वे वहां पहुंचे तो उन्हें पता चला कि नीम करौली बाबा का 11 सितंबर 1973 को निधन हो चुका था।

यानी जॉब्स की बाबा से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बावजूद कैंची धाम और भारत में बिताया उनका समय उनके आध्यात्मिक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। जॉब्स ने भारत में करीब सात महीने बिताए। इस दौरान उन्होंने कई धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों की यात्रा की और भारतीय जीवनशैली को करीब से देखा। बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने उत्तर भारत के कई इलाकों की यात्रा की। वह साधारण जीवनशैली में रहे और आध्यात्मिक अनुभवों को समझने की कोशिश करते रहे।

भारत यात्रा ने कैसे बदली जॉब्स की सोच?

स्टीव जॉब्स की भारत यात्रा के अनुभवों का उनके विचारों पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने भारतीय ग्रामीण जीवन और लोगों के अनुभवों को करीब से देखा। परमहंस योगानंद की किताब ‘Autobiography of a Yogi’ भी जॉब्स के जीवन में महत्वपूर्ण रही। बताया जाता है कि उन्होंने इस किताब को किशोरावस्था में पढ़ा था और भारत यात्रा के दौरान दोबारा पढ़ा। बाद में भी वह इस किताब को नियमित रूप से पढ़ते रहे। आध्यात्मिकता, सादगी और अंतर्ज्ञान से जुड़े विचार उनके जीवन और सोच का हिस्सा बने।

भारत से लौटने के बाद जॉब्स पर जेन बौद्ध धर्म और सादगी की विचारधारा का भी प्रभाव बताया जाता है। यही सादगी आगे चलकर Apple के उत्पादों की डिजाइन फिलॉसफी में नजर आई। Apple के उत्पादों में कम से कम चीजों के साथ सरल और खूबसूरत डिजाइन पर जोर दिया गया। जॉब्स की सोच में सादगी और उपयोगिता का यह मेल कंपनी की पहचान बन गया। फिल्म की सफलता में वर्ड ऑफ माउथ का असर ‘हनुमान अंश’ की कहानी में सबसे दिलचस्प पहलू इसकी बॉक्स ऑफिस यात्रा है। शुरुआती दिनों में धीमी कमाई के बाद फिल्म अचानक दर्शकों के बीच लोकप्रिय होने लगी। निर्माता के अनुसार, सोशल मीडिया और दर्शकों की आपसी चर्चा ने फिल्म को नई ऑडियंस तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा बढ़ती गई और सिनेमाघरों में इसका प्रदर्शन भी फिर मजबूत हुआ। इसी तेजी के चलते फिल्म ने अंतिम 10 दिनों में शुरुआती 20 दिनों की तुलना में कई गुना ज्यादा कमाई की। निर्माता ने फिल्म की सफलता को किसी चमत्कार से कम नहीं बताया। उनका कहना है कि शुरुआत में जब फिल्म को कमजोर प्रतिक्रिया मिली तो टीम का मनोबल टूट गया था, लेकिन बाद में दर्शकों का प्यार लगातार बढ़ता गया। अब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई के दावे के साथ ‘हनुमान अंश’ की चर्चा फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी हो रही है।

‘हनुमान अंश’ से जुड़े सवालों के जवाब

फिल्म ने 100 करोड़ का आंकड़ा कितने दिनों में पार किया?
निर्माता की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने रिलीज के 30 दिनों में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की।

शुरुआती 20 दिनों में फिल्म ने कितनी कमाई की थी?
बताया गया है कि पहले 20 दिनों में फिल्म ने करीब 12 करोड़ रुपये कमाए थे।

फिर कमाई में इतनी तेजी कैसे आई?
फिल्म की निर्माता के मुताबिक, दर्शकों की जुबानी चर्चा और सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता से फिल्म को नई गति मिली।

अनुप्रिया नागर को फिल्म बनाने की प्रेरणा कहां से मिली?
उन्होंने बताया कि नीम करौली बाबा और स्टीव जॉब्स से जुड़ी कहानी के बारे में पढ़ने के बाद उन्होंने इस विषय पर रिसर्च शुरू की, जिसने उन्हें फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया।

स्टीव जॉब्स कैंची धाम क्यों गए थे?
1974 में जॉब्स आध्यात्मिक स्पष्टता और आत्मज्ञान की तलाश में भारत आए थे। राम दास की पुस्तक ‘Be Here Now’ से प्रभावित होकर वह नीम करौली बाबा के कैंची धाम आश्रम जाने पहुंचे थे, लेकिन तब तक बाबा का निधन हो चुका था।

क्या जॉब्स की नीम करौली बाबा से मुलाकात हुई थी?
नहीं। जब जॉब्स कैंची धाम पहुंचे, तब नीम करौली बाबा का निधन हो चुका था। इसलिए दोनों की प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हुई।

फिल्म से होने वाले मुनाफे का क्या किया जाएगा?
अनुप्रिया नागर के अनुसार, वह फिल्म से मिलने वाले मुनाफे का इस्तेमाल जरूरतमंद बच्चों की मदद और दान जैसे कार्यों में करना चाहती हैं।

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