नई टिहरी :- टिहरी गढ़वाल के नई टिहरी स्थित बौराड़ी बस अड्डे (आईएसबीटी) में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब एशियाई विकास बैंक (ADB) की परियोजना के तहत बस अड्डा परिसर में बने खोकों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। बुलडोजर पहुंचते ही प्रभावित खोका मालिकों और कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, जिससे मौके पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
बस अड्डे के पुनर्विकास परियोजना के तहत हटाए जा रहे हैं खोके
जानकारी के अनुसार, “टिहरी झील क्षेत्र सतत एवं जलवायु-अनुकूल पर्यटन विकास परियोजना” के अंतर्गत बौराड़ी आईएसबीटी के आधुनिकीकरण और पुनर्विकास का कार्य किया जा रहा है। इसी योजना के तहत बस अड्डे परिसर में बने खोकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान ADB के अधिकारी और प्रशासन की ओर से तहसीलदार मौके पर पहुंचे तथा प्रभावित लोगों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। हालांकि खोका मालिकों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उचित मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक कार्रवाई रोक दी जाए।
रोजगार पर संकट का हवाला देकर किया विरोध
प्रदर्शन कर रहे खोका मालिकों का कहना था कि वे वर्षों से बस अड्डे परिसर में कारोबार कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में बिना पर्याप्त पुनर्वास और मुआवजे के उन्हें हटाना उनकी आजीविका पर सीधा असर डालेगा। विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता भी शामिल हुए और प्रभावित व्यापारियों के समर्थन में आवाज उठाई।
प्रशासन और ADB का पक्ष
ADB अधिकारियों का कहना है कि जिन खोका मालिकों के दस्तावेज वैध हैं, उन्हें नियमानुसार मुआवजा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, जिन खोकों को अवैध श्रेणी में माना गया है, उनके लिए मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। अधिकारियों के अनुसार पूरी कार्रवाई परियोजना के निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।
ADB अधिकारी का बयान
ADB के सहायक अभियंता (AE) अमित रूसिया ने कहा कि यह कार्रवाई मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर की जा रही है। उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक नियमों का पालन करते हुए संचालित की जा रही है तथा आगे की कार्रवाई भी निर्धारित आदेशों के अनुसार ही होगी।
पुनर्विकास बनाम आजीविका का सवाल
फिलहाल बौराड़ी बस अड्डे में खोकों को हटाने की कार्रवाई को लेकर विवाद बना हुआ है। एक ओर बस अड्डे के आधुनिकीकरण और पर्यटन विकास की योजना है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से कारोबार कर रहे दुकानदारों की आजीविका का मुद्दा भी सामने है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन प्रभावित लोगों के पुनर्वास, मुआवजे और सहायता को लेकर आगे क्या निर्णय लेता है।