नीट विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक बना सबसे बड़ा कारण

नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में कई महीनों से चल रहे छात्र आंदोलनों, विपक्ष के लगातार हमलों और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लंबे समय से छात्रों द्वारा जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही थी। नीट, यूजीसी-नेट समेत कई राष्ट्रीय परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोपों ने सरकार पर लगातार दबाव बढ़ाया, जिसके बाद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा घटनाक्रम बन गया। धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ। उनका परिवार लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक जीवन से जुड़ा रहा है।

उनके पिता डॉ. देबेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के ओडिशा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे, जबकि उनकी माता का नाम बसंत मंजरी प्रधान है। उनकी पत्नी मृदुला ठाकुर प्रधान हैं और उनके दो बच्चे हैं। उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय, वाणी विहार से मानव विज्ञान में एमए की पढ़ाई की। छात्र जीवन के दौरान ही वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े और यहीं से उनकी सक्रिय राजनीतिक यात्रा शुरू हुई। धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित अध्याय वर्ष 1997 में सामने आया, जब वे एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव थे। उस समय ओडिशा में 12वीं बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों को लेकर छात्रों में भारी नाराजगी थी। धर्मेंद्र प्रधान ने सैकड़ों छात्र कार्यकर्ताओं के साथ भुवनेश्वर में विधानसभा के बाहर बड़ा प्रदर्शन किया और सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

उस दौर में ओडिशा में लगातार कई वर्षों तक प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं सामने आने के कारण छात्र इसे ‘प्रश्नपत्र लीक का दशक’ कहने लगे थे। प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान समेत कई छात्र नेता घायल हुए। इस आंदोलन ने उन्हें छात्र राजनीति में एक मजबूत पहचान दिलाई और आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई। करीब तीन दशक बाद हालात पूरी तरह बदल गए। कभी पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर संघर्ष करने वाले धर्मेंद्र प्रधान स्वयं देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने, लेकिन उनके कार्यकाल में नीट, यूजीसी-नेट और अन्य परीक्षाओं में कथित पेपर लीक व अनियमितताओं के आरोपों ने सरकार को घेर लिया। छात्रों ने लगातार निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई। बढ़ते जनदबाव और राजनीतिक विवाद के बीच आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री के पद छोड़ने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे देश की परीक्षा प्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे गंभीर सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या बड़े कदम उठाती है।

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