नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद रेस्क्यू तेज, विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी लापता

काठमांडू/नई दिल्ली:- नेपाल में भोटेकोशी नदी क्षेत्र में बुधवार को आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस आपदा में अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 133 भारतीय नागरिकों समेत करीब 750 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों के शामिल होने की भी जानकारी है। बताया जा रहा है कि सुबह अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। कई घर, वाहन और बुनियादी ढांचे पानी के तेज बहाव में बह गए। महत्वपूर्ण पुलों को नुकसान पहुंचने से कई क्षेत्रों का संपर्क टूट गया है, जबकि करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं के प्रभावित होने की खबर है। राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।

हिमस्खलन से जुड़ सकती है बाढ़ की वजह

रिपोर्टों के अनुसार, इस अचानक आई बाढ़ के पीछे ग्लेशियर क्षेत्र में हुए हिमस्खलन की आशंका जताई जा रही है। बताया गया कि हिमस्खलन के कारण भोटेकोशी की एक सहायक नदी ल्हेंडे का बहाव बाधित हुआ, जिसके बाद पानी का तेज प्रवाह निचले इलाकों की ओर बढ़ गया। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ का असर चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी और तिमुरे क्षेत्र में भी देखने को मिला। कई बस्तियां इसकी चपेट में आ गईं और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। कई स्थानों पर संचार सेवाएं और सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

133 भारतीय नागरिकों समेत 750 लोग लापता

इस आपदा के बाद लापता लोगों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 750 लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है, जिनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत एजेंसियां, सुरक्षाबल और स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल में मौजूद पर्यटकों और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े कई लोगों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण परिजनों और राहत एजेंसियों को जानकारी जुटाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के 77 लोगों से संपर्क नहीं

ईशा फाउंडेशन की ‘सेक्रेड वॉक्स’ यात्रा से जुड़े 77 तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं होने की जानकारी सामने आई है। फाउंडेशन के अनुसार, यह समूह तिब्बती इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद काठमांडू लौट रहा था। बताया गया कि ग्रुप से सुबह करीब 9:05 बजे संपर्क हुआ था, लेकिन इसके कुछ समय बाद दोबारा संपर्क नहीं हो सका। संचार लाइनें बाधित होने के कारण उनकी स्थिति की आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

सद्गुरु ने 80 विदेशी नागरिकों के समूह का जिक्र किया

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने नेपाल में फंसे या संपर्क से बाहर लोगों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि एक समूह में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और अन्य देशों के कुल 80 लोग शामिल हैं। सद्गुरु के अनुसार, प्रभावित इलाके में संचार सेवाएं ठप हैं और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण कई स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। हालांकि इन लोगों की स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

कोलकाता का 32 सदस्यीय कैलाश मानसरोवर समूह भी संपर्क से बाहर

नेपाल की बाढ़ के बाद पश्चिम बंगाल के कई लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए निकला 32 सदस्यीय एक समूह भी संपर्क से बाहर बताया गया है। इस समूह में 30 पर्यटक और दो टूर मैनेजर शामिल थे। जानकारी के मुताबिक यह दल 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था।

भारतीय वायुसेना ने C-130J विमान किया तैनात

नेपाल में राहत कार्यों के लिए भारत ने मानवीय सहायता भेजी है। भारतीय वायुसेना ने 10 टन आवश्यक राहत सामग्री और मेडिकल सप्लाई पहुंचाने के लिए C-130J विमान तैनात किया है। वायुसेना के अनुसार, जरूरत के अनुसार C-17 और C-130 विमानों के जरिए अतिरिक्त राहत सामग्री पहुंचाई जा सकती है। बचाव अभियान और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों की भी व्यवस्था की गई है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दी सहायता की जानकारी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से निपटने के लिए भारत की ओर से मानवीय सहायता और 10 टन आपदा राहत सामग्री भेजी गई है। राहत सामग्री में दवाइयों के साथ अन्य जरूरी सामान भी शामिल हैं। भारत ने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में नेपाल और उसके नागरिकों के साथ खड़े रहने की बात कही है।

नेपाल के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी का जताया आभार

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भारत की ओर से सहायता और समर्थन की पेशकश के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत और बचाव कार्यों में सहयोग की सराहना की। बाढ़ के कारण नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी नुकसान की खबर है। पुलों और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से कई क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है।

RSS और अन्य संगठनों ने मदद की अपील की

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने नेपाल में हुई इस त्रासदी पर दुख जताया है। संगठन ने कहा कि वह प्रभावित लोगों तक हरसंभव सहायता पहुंचाने के लिए तैयार है और लोगों से भी संकट की इस घड़ी में सहयोग के लिए आगे आने की अपील की है। वहीं, ओडिशा सरकार ने नेपाल में फंसे या प्रभावित राज्य के लोगों की सहायता के लिए नई दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित करने और हेल्पलाइन नंबर जारी करने की जानकारी दी है। नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है। प्रभावित इलाकों में संचार और सड़क संपर्क बहाल करना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर आगे भी बदलाव संभव है।

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