राज्यसभा में मंगलवार को राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाने की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और बाद में 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद सदस्यों से शून्यकाल में लोकमहत्व के मुद्दे उठाने को कहा गया। बीजू जनता दल के डॉ. संतृप्त मिश्र को अपनी बात रखने का मौका मिला। उन्होंने ओडिशा में उर्वरक की उपलब्धता से जुड़ा मुद्दा ओड़िया भाषा में उठाया।
इसी दौरान विपक्षी सदस्य नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने की अनुमति देने की मांग करने लगे। मिश्र का वक्तव्य खत्म होने से पहले खरगे खड़े हुए और राम मंदिर से जुड़ा मुद्दा उठाने की अनुमति मांगी। खरगे ने कहा कि वह नया मुद्दा उठाना चाहते हैं और यह राम मंदिर से संबंधित है। उनके इतना कहते ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विरोध शुरू कर दिया। बढ़ते हंगामे के बीच सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सभापति ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की। इसी दौरान खरगे ने फिर राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाने की मांग की। सभापति ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सत्ता पक्ष के सदस्यों को भी झारखंड से जुड़े मुद्दे को उठाने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि वह राज्य का विषय है।
राधाकृष्णन ने कहा कि विपक्ष को हर दिन एक ही विषय उठाकर सदन की कार्यवाही बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने खरगे और अन्य विपक्षी सदस्यों से अपनी सीट पर बैठने की अपील की। सभापति ने कहा कि उन्होंने पहले भी खरगे को कई बार बोलने की अनुमति दी है, लेकिन राज्य से जुड़े विषय को सदन में उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद विपक्षी सदस्यों का हंगामा और नारेबाजी जारी रही। सभापति ने प्रश्नकाल के जरिए कार्यवाही आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण ऐसा नहीं हो सका। लगातार हंगामे के बाद सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।