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“रुद्रप्रयाग आपदा: तबाही के मंजर ने विधायक आशा नौटियाल को रुला दिया, छलक पड़े संवेदनाओं के आंसू”

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में लगातार भारी बारिश और भूस्खलन ने तबाही का ऐसा मंजर खड़ा कर दिया है, जिसे देखकर कोई भी सहम सकता है। पहाड़ों से टूट-टूटकर गिरते मलबे ने कई गांवों और बाज़ारों को अपनी चपेट में ले लिया है। सड़कों पर दरारें पड़ गई हैं, कई रास्ते ध्वस्त हो गए हैं और दर्जनों लोग लापता बताए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की टीमें जान जोखिम में डालकर मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं, लेकिन मार्ग बाधित होने से राहत कार्य बेहद मुश्किल साबित हो रहे हैं।

आपदा क्षेत्र में पहुंचीं विधायक आशा नौटियाल

इस भयावह स्थिति के बीच केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल शनिवार को बड़ेथ और छेनागाड़ जैसे आपदा प्रभावित इलाकों में पहुंचीं। वहां के हालात देखकर वह खुद को संभाल नहीं पाईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। पास खड़े एक व्यक्ति ने इस भावुक पल की तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर डाल दी, जो अब चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तस्वीर किसी राजनीतिक नाटक की नहीं बल्कि एक इंसान के दिल की सच्ची पीड़ा को दर्शाती है। अपने ही क्षेत्र के लोगों को मलबे और बर्बादी में डूबते देख कोई भी आम इंसान टूट सकता है—फिर चाहे वह एक विधायक ही क्यों न हो।

पहले भी झेली थी कठिनाई

गौरतलब है कि अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ जब केदारघाटी करीब एक साल तक बिना विधायक के रही थी। इस दौरान कुंड, गुप्तकाशी, उखीमठ, मक्कू और फाटा जैसे इलाकों तक पहुंच बनाने के लिए सड़कों को बड़ी मुश्किल से दुरुस्त किया गया था। लेकिन अब हालिया आपदा ने फिर से इन सड़कों को तोड़कर रख दिया है। कहीं पहाड़ों से मलबा बिखरा है, तो कहीं रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं।

आपदा में अवसर तलाशते राजनेता

जहां एक ओर विधायक आशा नौटियाल के आंसू क्षेत्र के प्रति उनकी संवेदनशीलता का प्रतीक बने, वहीं दूसरी ओर कुछ नेता इस मौके पर भी राजनीति से बाज़ नहीं आए। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे सहानुभूति पाने का प्रयास बता रहे हैं, तो वहीं कई अन्य विपक्षी नेताओं ने इस आपदा की घड़ी में विधायक के साथ खड़े होकर उनका समर्थन किया है।

जनता को संदेश

इस कठिन समय में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस त्रासदी को केवल राजनीतिक चश्मे से देखा जाए या फिर इसे मानवता के दृष्टिकोण से? केदारनाथ क्षेत्र के लोग आज राहत, मदद और सहारे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों पर उनकी निगाहें टिकी हैं। विधायक के आंसू केवल एक तस्वीर नहीं हैं, बल्कि उस दर्द का आईना हैं जो इस समय पूरी घाटी के लोग झेल रहे हैं। यह आपदा हमें एकजुट होकर इंसानियत और सहयोग की मिसाल पेश करने का मौका भी देती है।

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