उत्तराखंड के रामनगर निवासी मर्चेंट नेवी अधिकारी कैप्टन अजय पंत इन दिनों एक अंतरराष्ट्रीय विवाद के चलते चर्चा में हैं। रूस से भारत के लिए कच्चा तेल लेकर आ रहे तेल टैंकर के कप्तान अजय पंत को ब्रिटिश अधिकारियों ने समुद्र में चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद उनके परिवार में चिंता का माहौल है, जबकि उत्तराखंड सरकार और भारत का विदेश मंत्रालय भी मामले पर नजर बनाए हुए है।
जानकारी के अनुसार कैप्टन अजय पंत 4 जून 2026 को रूस के उस्त-लूगा बंदरगाह से एमवी स्मिर्टोस (MV Smyrtos) नामक तेल टैंकर की कमान संभालकर भारत के गुजरात स्थित सिक्का पोर्ट के लिए रवाना हुए थे। जहाज में लगभग 1 लाख 1 हजार 400 टन कच्चा तेल लदा हुआ था, जिसे भारत पहुंचाया जाना था। यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन बीच समुद्र में जहाज की कानूनी स्थिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
बताया जा रहा है कि यह जहाज पहले अफ्रीकी देश कैमरून के ध्वज के तहत पंजीकृत था। हालांकि रूस से जुड़े प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण जून की शुरुआत में कैमरून ने उसका पंजीकरण रद्द कर दिया था। इसके बाद जहाज कथित रूप से बिना किसी राष्ट्रीय ध्वज के संचालित हो रहा था, जिसे समुद्री कानून की भाषा में “स्टेटलेस वेसल” कहा जाता है। इसी स्थिति ने आगे चलकर पूरे मामले को और जटिल बना दिया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जैसे ही एमवी स्मिर्टोस ब्रिटेन के समुद्री अधिकार क्षेत्र में पहुंचा, ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय और नेशनल क्राइम एजेंसी सक्रिय हो गई। देर रात एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें चिनूक हेलिकॉप्टर की मदद से रॉयल मरीन कमांडो जहाज पर उतरे। कमांडो ने पूरे टैंकर को अपने नियंत्रण में लिया और जहाज के संचालन से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू की। इसके बाद कैप्टन अजय पंत को हिरासत में ले लिया गया।
ब्रिटिश अधिकारियों का आरोप है कि जहाज रूस से जुड़े तेल व्यापार पर लागू प्रतिबंधों के उल्लंघन में शामिल हो सकता है। इसी आधार पर जांच शुरू की गई और कानूनी कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी के बाद कैप्टन अजय पंत को अदालत में पेश किया गया, जहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। अदालत के आदेश के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 16 जुलाई को होनी है, जिस पर परिवार और समर्थकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
कैप्टन अजय पंत के परिवार का कहना है कि वह केवल एक पेशेवर मर्चेंट नेवी अधिकारी हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे। परिवार का मानना है कि जहाज की व्यावसायिक और कानूनी स्थिति से जुड़े निर्णय जहाज मालिकों और प्रबंधन स्तर पर लिए जाते हैं। ऐसे में एक पेशेवर कप्तान को इस तरह कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, जिससे परिवार बेहद चिंतित है।
मामले के सामने आने के बाद उत्तराखंड सरकार ने विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग को आवश्यक कानूनी और कांसुलर सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। भारतीय उच्चायोग लगातार मामले पर नजर बनाए हुए है और कैप्टन अजय पंत को हरसंभव सहायता प्रदान करने की कोशिश कर रहा है।
अब पूरे उत्तराखंड और देशभर के लोगों की नजरें 16 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। इस सुनवाई से यह साफ हो सकेगा कि कैप्टन अजय पंत को राहत मिलती है या उन्हें ब्रिटेन में लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।