स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य किए जाने के सरकार के फैसले पर सिख संगठनों और पंथक संस्थाओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। बुधवार को विभिन्न सिख संगठनों के प्रतिनिधियों ने श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को मांगपत्र सौंपकर मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। संगठनों ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है। सिख संगठनों के नेताओं का कहना है कि सिख धर्म की अपनी धार्मिक मर्यादाएं और विशिष्ट सिद्धांत हैं, जिनमें एक ईश्वर की उपासना को प्रमुख स्थान दिया गया है। उनका आरोप है कि ‘वंदे मातरम’ को शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य करने का फैसला इन धार्मिक सिद्धांतों को लेकर समुदाय के बीच चिंता पैदा करता है। संगठनों ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई है कि नियम का पालन नहीं करने पर दंड या जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।
प्रतिनिधियों ने श्री अकाल तख्त साहिब और एसजीपीसी से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी सिख संस्थाओं और पंथक संगठनों को एक मंच पर लाने की अपील की। उनका कहना है कि धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर समुदाय की सामूहिक राय सामने आनी चाहिए और सरकार के समक्ष अपनी आपत्ति मजबूती से रखी जानी चाहिए। संगठनों के नेताओं ने गुरु तेग बहादुर साहिब के बलिदान का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दिए गए ऐतिहासिक बलिदान से सिख समुदाय को प्रेरणा मिलती है और अपने धार्मिक अधिकारों से जुड़े मामलों में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाना जरूरी है। सिख संगठनों ने उम्मीद जताई कि श्री अकाल तख्त साहिब और एसजीपीसी इस मामले में जल्द पहल करेंगे। अब इस मुद्दे पर सिख संस्थाओं की अगली रणनीति और सरकार की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।