उत्तराखंड की 11 साल की काया ध्यानी ने मलेशिया में लहराया परचम, कॉमनवेल्थ स्कूल चेस टूर्नामेंट में जीता सिल्वर – Alam E Tasveer
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उत्तराखंड की 11 साल की काया ध्यानी ने मलेशिया में लहराया परचम, कॉमनवेल्थ स्कूल चेस टूर्नामेंट में जीता सिल्वर

देहरादून: उत्तराखंड की होनहार बाल शतरंज खिलाड़ी काया ध्यानी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। मलेशिया में आयोजित कॉमनवेल्थ स्कूल चेस टूर्नामेंट 2026 में काया ने रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। महज 11 साल की उम्र में इस उपलब्धि को हासिल करने वाली काया की सफलता से देहरादून सहित पूरे उत्तराखंड में खुशी का माहौल है।

मलेशिया में काया ध्यानी ने जीता सिल्वर मेडल

मलेशिया में 4 से 12 अक्टूबर 2026 तक कॉमनवेल्थ स्कूल चेस टूर्नामेंट आयोजित किया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में विभिन्न वर्गों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता के अंडर-11 गर्ल्स रैपिड चेस वर्ग में काया ध्यानी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया और रजत पदक अपने नाम किया। काया की इस उपलब्धि ने दिखाया है कि कम उम्र में भी मेहनत, लगन और शतरंज की अच्छी समझ के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।

देहरादून के CJM स्कूल में पढ़ती हैं काया

काया ध्यानी देहरादून के CJM स्कूल में कक्षा छह की छात्रा हैं। पढ़ाई के साथ शतरंज में अपनी प्रतिभा को निखार रहीं काया ने इस उपलब्धि के जरिए उत्तराखंड के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। उनकी सफलता से प्रदेश में बाल प्रतिभाओं और शतरंज जैसे खेलों को प्रोत्साहन देने की जरूरत भी सामने आती है। काया की उपलब्धि न केवल उनके परिवार और स्कूल के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उत्तराखंड के खेल जगत के लिए भी उत्साह बढ़ाने वाली खबर है।

उत्तराखंड की उभरती खेल प्रतिभा ने बढ़ाया देश का मान

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। काया ध्यानी ने 11 वर्ष की उम्र में यह मुकाम हासिल कर अपनी क्षमता साबित की है। उनकी इस सफलता से उम्मीद है कि प्रदेश के अन्य बच्चे भी खेलों में आगे बढ़ने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित होंगे।उत्तराखंड की इस होनहार खिलाड़ी की उपलब्धि पर अब सभी की निगाहें उनके आगामी प्रदर्शन पर रहेंगी। काया ध्यानी की यह सफलता उनके शतरंज सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

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