दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की एविएशन सिक्योरिटी ग्रुप (ASG) यूनिट को एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। CISF ने एयरपोर्ट सुरक्षा संचालन के लिए ISO 9001:2015 क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम (QMS) सर्टिफिकेशन का सफलतापूर्वक नवीनीकरण (Renewal) करा लिया है। यह उपलब्धि सुरक्षा प्रबंधन, परिचालन उत्कृष्टता और यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने की CISF की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह प्रतिष्ठित प्रमाणन विश्व की अग्रणी स्वतंत्र प्रमाणन संस्था DNV (Det Norske Veritas) द्वारा प्रदान किया गया है। सर्टिफिकेशन से पहले IGI एयरपोर्ट पर लागू सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली का व्यापक ऑडिट और विस्तृत मूल्यांकन किया गया। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद CISF को यह प्रमाणन अगले तीन वर्षों के लिए प्रदान किया गया है।
CISF को इससे पहले भी अपनी सुरक्षा प्रक्रियाओं के लिए ISO प्रमाणन मिल चुका था, लेकिन इस बार यह प्रमाणन एक कठोर री-सर्टिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरने के बाद प्राप्त हुआ है। इससे साबित होता है कि CISF लगातार बदलती सुरक्षा चुनौतियों और बढ़ती यात्री संख्या के बीच अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए उच्च गुणवत्ता मानकों को बनाए रख रही है।
यह प्रमाणन IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल-1, टर्मिनल-2, टर्मिनल-3, कार्गो टर्मिनल और अन्य परिचालन क्षेत्रों में CISF द्वारा प्रदान की जा रही सुरक्षा सेवाओं को कवर करता है। दुनिया के सबसे व्यस्त एविएशन हब में शामिल IGI एयरपोर्ट पर प्रतिदिन लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है, ऐसे में यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यात्रियों को बेहतर और तेज़ यात्रा अनुभव देने के लिए CISF ने कई आधुनिक तकनीकों को अपनाया है। टर्मिनल-2 और टर्मिनल-3 पर बायोमेट्रिक आधारित ‘डिजी यात्रा’ प्रणाली को लागू किया गया है, जिससे यात्रियों को बिना रुकावट और तेज़ यात्रा का अनुभव मिलता है। इसके अलावा सुरक्षा जांच को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ऑटोमेटेड ट्रे रिट्रीवल सिस्टम (ATRS), डुअल-व्यू एक्स-रे बैगेज इंस्पेक्शन सिस्टम (X-BIS) और कंप्यूटर टोमोग्राफी एक्सप्लोसिव डिटेक्शन सिस्टम (CT-EDS) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
एयरपोर्ट की बाहरी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एडवांस्ड फाइबर-ऑप्टिक आधारित पेरिमीटर इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (PIDS) लगाया गया है, जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत निगरानी रखता है। इसके साथ ही CISF जवानों को ‘दिशा’ नामक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत व्यवहार, ग्राहक सेवा और विवाद समाधान जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि सुरक्षा के साथ-साथ यात्रियों को बेहतर अनुभव भी मिल सके।
भीड़भाड़ वाले समय में यात्रियों की संख्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए CISF ने टर्मिनल-3 में नया सिक्योरिटी जोन विकसित किया है। प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती, डिजिटल काउंटिंग सिस्टम और एयरलाइंस के साथ बेहतर समन्वय के जरिए यात्रियों की प्रोसेसिंग को तेज किया गया है। हैंड बैगेज टैग स्टैम्पिंग की प्रक्रिया समाप्त होने से भी यात्रियों का समय बचा है।
यात्री सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए CISF ने ‘लॉस्ट एंड फाउंड’ यानी खोया-पाया प्रणाली को भी मजबूत किया है। सुरक्षा कर्मी यात्रियों के छूटे हुए सामान जैसे मोबाइल फोन, पासपोर्ट और वॉलेट को खोजकर उन्हें उड़ान से पहले ही लौटाने का प्रयास करते हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट सिक्योरिटी कंट्रोल सेंटर (ASCC) और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से यात्रियों की शिकायतों और सवालों का त्वरित समाधान किया जाता है।
CISF का यह ISO 9001:2015 प्रमाणन न केवल उसकी पेशेवर क्षमता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट सुरक्षा, तकनीक और यात्री सेवाओं के मामले में लगातार वैश्विक मानकों की ओर बढ़ रहा है।