सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब में सोमवार को एक ऐतिहासिक और दुर्लभ संयोग देखने को मिला। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, आम आदमी पार्टी के कई मंत्रियों और विधायकों के साथ श्री अकाल तख्त सचिवालय में पेश हुए। यह घटनाक्रम ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026’ से जुड़े मामले में अकाल तख्त साहिब की ओर से तलब किए जाने के बाद हुआ। इस पेशी को सिख इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
इस अवसर ने सिख इतिहास की एक पुरानी घटना की भी याद ताजा कर दी। कुलतार सिंह संधवां, भारत के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के भाई के पोते हैं। लगभग 42 वर्ष पहले वर्ष 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होने के लिए तलब किया गया था। अब चार दशक से अधिक समय बाद उसी परिवार का एक और सदस्य अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित हुआ है।
सिख इतिहास में यह दूसरा अवसर माना जा रहा है जब एक ही परिवार के दो सदस्य अलग-अलग समय में श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हुए हैं। इससे पहले बादल परिवार के दो सदस्यों की पेशी भी इतिहास में दर्ज हो चुकी है। कुलतार सिंह संधवां की पेशी ने इस ऐतिहासिक क्रम में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
इस पेशी के साथ कुलतार सिंह संधवां पंजाब विधानसभा के पहले स्पीकर भी बन गए हैं, जिन्हें श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा औपचारिक रूप से तलब किया गया। उनके साथ आम आदमी पार्टी के कई मंत्री और विधायक भी अकाल तख्त सचिवालय पहुंचे और अपना पक्ष रखा। सभी नेताओं ने धार्मिक परंपराओं और मर्यादा का पालन करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष उपस्थिति दर्ज कराई।
श्री अकाल तख्त साहिब की यह कार्रवाई सिख पंथ की परंपराओं और धार्मिक अनुशासन के तहत की गई है। राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अकाल तख्त साहिब के निर्देशों और फैसलों पर सभी की नजर बनी रहेगी।