किसान घाट पर आज महापंचायत, पंजाब से लेकर ओडिशा तक किसान नेता बनाएंगे सरकार पर दबाव – Alam E Tasveer
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किसान घाट पर आज महापंचायत, पंजाब से लेकर ओडिशा तक किसान नेता बनाएंगे सरकार पर दबाव

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसानों का विरोध अब राजधानी दिल्ली तक पहुंचने जा रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों से किसान मंगलवार को दिल्ली के किसान घाट पर आयोजित होने वाली महापंचायत में शामिल होंगे। किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते को किसान हितों के खिलाफ माना जा रहा है और इसके विरोध में देशभर के किसान अपनी आवाज बुलंद करेंगे। यह महापंचायत ‘देश बचाओ मोर्चा’ के आह्वान पर आयोजित की जा रही है। किसान नेताओं का कहना है कि भारत-अमेरिका के बीच होने वाले किसी भी व्यापार समझौते का सीधा या अप्रत्यक्ष असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों के हितों, उनकी आय, फसलों के दाम और घरेलू कृषि बाजार की सुरक्षा को लेकर सरकार को स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों का बड़ा जुटान

किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसानों के बीच गंभीर चिंता है। उनका आरोप है कि अगर समझौते में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए, जिनसे विदेशी कृषि उत्पादों की भारत में आसान पहुंच बढ़ती है, तो इसका असर देश के किसानों पर पड़ सकता है।

किसान संगठनों का कहना है कि भारतीय कृषि क्षेत्र पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले किसानों के हितों और देश की कृषि अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पंधेर ने साफ कहा कि किसान किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे, जिसे वे अपने हितों के खिलाफ मानते हैं। उनका कहना है कि किसानों की मांगों को नजरअंदाज कर कोई फैसला लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।

पंजाब से दिल्ली के लिए रवाना होंगी बसें

महापंचायत में बड़ी संख्या में किसानों के शामिल होने की संभावना है। पंजाब से किसानों को दिल्ली ले जाने के लिए कई बसें सोमवार को रवाना होने की बात कही गई है। किसान नेताओं ने पंजाब के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा के किसानों से भी दिल्ली पहुंचने की अपील की है। आयोजकों का कहना है कि यह सिर्फ किसानों का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसमें मजदूरों और युवाओं से भी बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया गया है। महापंचायत के जरिए केंद्र सरकार तक किसानों की चिंताओं और मांगों को पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

‘सरकार पर दबाव बनाना है मकसद’

किसान नेताओं के अनुसार महापंचायत का मुख्य उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना है, ताकि भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते के संभावित प्रभावों पर किसानों के पक्ष को गंभीरता से सुना जाए। किसान संगठनों की मांग है कि किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों, किसान संगठनों और संबंधित हितधारकों से व्यापक चर्चा की जाए। उनका कहना है कि कृषि सिर्फ व्यापार का विषय नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका और देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

पंधेर की चेतावनी- किसानों को रोकने की कोशिश हुई तो होगा विरोध

महापंचायत से पहले किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने सरकार को चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि किसानों को राजधानी पहुंचने से रोकने या उनके रास्ते में अनावश्यक बाधाएं खड़ी करने की कोशिश की गई तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। पंधेर का कहना है कि किसानों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन किसानों के शांतिपूर्ण कार्यक्रम में अनावश्यक रुकावट नहीं डालेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसानों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिलता है, तो कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगा।

एक दिवसीय कार्यक्रम, शाम चार बजे समाप्त होगी महापंचायत

किसान घाट पर आयोजित होने वाली यह महापंचायत एक दिवसीय कार्यक्रम होगी। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम शाम करीब चार बजे समाप्त किया जाएगा। किसान नेताओं ने अधिक से अधिक संख्या में किसानों, मजदूरों और युवाओं से इसमें शामिल होने की अपील की है। महापंचायत में व्यापार समझौते के अलावा किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

कई राज्यों के किसानों की भागीदारी पर नजर

इस महापंचायत में पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा के किसानों की भागीदारी पर खास नजर रहेगी। यदि बड़ी संख्या में किसान राजधानी पहुंचते हैं, तो यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। किसानों का कहना है कि उनका विरोध किसी एक राज्य या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि क्षेत्र के व्यापक हितों से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

क्यों अहम है भारत-अमेरिका व्यापार समझौता?

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में चर्चाएं जारी हैं। ऐसे समझौतों में आमतौर पर आयात-निर्यात, शुल्क और विभिन्न उत्पादों के बाजार तक पहुंच से जुड़े प्रावधान शामिल होते हैं। किसानों की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि यदि विदेशी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में पहुंच आसान होती है, तो इसका घरेलू किसानों और फसलों की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा। किसान संगठनों का कहना है कि व्यापार नीति बनाते समय छोटे और सीमांत किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

महापंचायत से आगे की रणनीति पर भी हो सकता है फैसला

दिल्ली में होने वाली महापंचायत में किसान संगठनों की आगे की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है। यदि किसानों को लगता है कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दी जा रही है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा सकती है। फिलहाल किसान संगठनों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की बात कही है। हालांकि, किसान नेता यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्हें राजधानी पहुंचने से रोकने की कोशिश हुई तो इसका विरोध किया जाएगा।

कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ दिल्ली में होने वाली यह महापंचायत किसान संगठनों की एकजुटता और केंद्र सरकार पर उनके दबाव की रणनीति का बड़ा प्रदर्शन मानी जा रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि महापंचायत में कितनी संख्या में किसान पहुंचते हैं और सरकार की ओर से इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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