पंजाब में विभिन्न मांगों को लेकर करीब तीन लाख सरकारी कर्मचारी गुरुवार को हड़ताल पर चले गए हैं। सवा तीन लाख पेंशनर्स ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। हड़ताल के चलते सरकारी दफ्तरों में कामकाज प्रभावित रहा, जबकि सरकारी अस्पतालों में ओपीडी और तय ऐच्छिक सर्जरी सेवाएं बंद रहीं। हालांकि इमरजेंसी, जच्चा-बच्चा देखभाल, भर्ती मरीजों का इलाज और अन्य जरूरी सेवाएं जारी रखी गईं। इसी बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कर्मचारी संगठनों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को जालंधर में बातचीत के लिए बुलाया है। फिरोजपुर में कर्मचारियों ने डीसी कार्यालय के सामने धरना देकर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन कई मांगें अब भी लंबित हैं। उन्होंने सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
लुधियाना-बठिंडा राजमार्ग पर गुरुसर सुधार में लोकतांत्रिक शिक्षक मोर्चा ने भी प्रदर्शन किया। शिक्षक नेताओं ने लंबित महंगाई भत्ते, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, छठे वेतन आयोग के बकाये और बंद किए गए विभिन्न भत्तों को बहाल करने की मांग उठाई। साथ ही कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने और स्कूलों में काम करने वाले सफाई कर्मचारियों, चौकीदारों और मिड-डे मील कर्मियों की वेतन संबंधी समस्याओं का समाधान करने की मांग की गई। हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा है। पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने एक दिन के लिए ओपीडी बंद रखने और ऐच्छिक सर्जरी स्थगित करने का फैसला किया। हालांकि आपातकालीन सर्जरी, इमरजेंसी सेवाएं, जच्चा-बच्चा देखभाल, भर्ती मरीजों का इलाज, पोस्टमार्टम और न्यायिक मेडिकल जांच जैसी जरूरी सेवाएं जारी रखी गईं।
वहीं, कर्मचारियों और पेंशनर्स के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हजारों कर्मचारियों के सेक्टर-17 से पंजाब सचिवालय की ओर कूच करने की संभावना को देखते हुए करीब 1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग, रिजर्व फोर्स और ड्रोन निगरानी की व्यवस्था की गई है। पुलिस विधानसभा, राजभवन और पंजाब सचिवालय समेत प्रमुख सरकारी परिसरों पर भी नजर रख रही है। कर्मचारी संगठन लंबित डीए, पुरानी पेंशन योजना और अन्य सेवा संबंधी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। अब मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक में किसी समाधान पर सहमति बनती है या कर्मचारी आंदोलन को आगे बढ़ाते हैं, इस पर सभी की नजर है।