हल्द्वानी:- नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से फैली बीमारी के मामले में जांच के बाद स्थिति और गंभीर होती नजर आ रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की ओर से लिए गए पानी के नमूनों की जांच में पानी की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी। रिपोर्ट में पानी में खतरनाक बैक्टीरिया और फीकल प्रदूषण की पुष्टि हुई है। ज्योलीकोट और आसपास के इलाकों में दूषित पानी से बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने और तीन लोगों की मौत के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया था। कोर्ट ने प्रभावित क्षेत्रों में पानी के स्रोतों की जांच और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
PCB की जांच में पानी की गुणवत्ता फेल
8 सितंबर को PCB की टीम ने ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में पानी के नमूने लिए थे। बाद में इनकी जांच स्थानीय और देहरादून स्थित प्रयोगशालाओं में कराई गई। सामने आई रिपोर्टों में पानी में बैक्टीरियल कंटेमिनेशन पाया गया। रिपोर्टों के अनुसार, नमूनों में कोलीफॉर्म, ई-कोलाई, फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस जैसे बैक्टीरिया पाए गए। कुछ नमूनों में मानव और कुछ में पशुओं के मल-मूत्र से जुड़े प्रदूषण की पुष्टि की गई है।
जल संस्थान की रिपोर्ट से अलग निकले नतीजे
इस मामले में PCB की रिपोर्ट और जल संस्थान की ओर से कराई गई शुरुआती जांच के नतीजों में अंतर सामने आया है। जल संस्थान की ओर से बाद के कुछ नमूनों को सामान्य बताए जाने के बीच PCB की रिपोर्ट में पानी के दूषित होने की पुष्टि हुई। इसी विरोधाभास को लेकर हाईकोर्ट ने अधिकारियों से जवाब मांगा और मामले की निगरानी के लिए मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर दोबारा पानी की जांच कराने को भी कहा है।
नए सैंपलों की भी जांच जारी
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद प्रभावित इलाकों से दोबारा पानी के नमूने लिए जा रहे हैं। अधिकारियों की मौजूदगी में अलग-अलग स्थानों से सैंपल एकत्र किए गए हैं। इनकी जांच थर्ड पार्टी और अधिकृत प्रयोगशालाओं से कराई जा रही है, ताकि पानी की मौजूदा स्थिति स्पष्ट हो सके। PCB के क्षेत्रीय अधिकारी अनुराग नेगी के अनुसार, दूषित पानी की पुष्टि के बाद विभाग की टीम दोबारा प्रभावित इलाकों में सैंपलिंग कर रही है।
इन इलाकों से लिए गए थे पानी के नमूने
प्रारंभिक सैंपलिंग के दौरान ज्योलीकोट, बेलुवाखान, वीरभट्टी, गेठिया, चोपड़ा और सरियाताल समेत कई स्थानों से पानी के नमूने लिए गए थे। इनमें जल टंकियों, नल और जल स्रोतों को शामिल किया गया था। प्रमुख स्थानों में मनोरा जल टंकी, लोअर मनोरा वाटर टैंक, मल्ला बेलुवाखान, वीरभट्टी स्थित चीना गांव का नल जल, पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती स्कूल के पास जल स्रोत, देबुवाजाला जल टैंक, ज्योलीकोट का रामलीला मैदान क्षेत्र, चोपड़ा की पानी की टंकी और सरियाताल की पानी की टंकी शामिल हैं।
दूषित पानी से फैली जलजनित बीमारियां
ज्योलीकोट ब्लॉक के कई गांवों में दूषित पानी की समस्या के बाद लोगों में उल्टी-दस्त, पीलिया, डायरिया और हेपेटाइटिस-ए जैसी जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए हैं। हाईकोर्ट में पेश जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए हैं और तीन मौतें भी रिपोर्ट की गई हैं।
सीवर और पेयजल लाइन के दूषित होने की आशंका
मामले की शुरुआती जांच में सीवर के पानी के पेयजल स्रोतों में मिलने की आशंका सामने आई थी। हाईकोर्ट में जल संस्थान की ओर से भी पुराने कूड़ा खड्ड के आसपास पेयजल स्रोत के दूषित होने की बात रखी गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले भी पेयजल में बदबू आने और गुणवत्ता खराब होने की शिकायत की थी। हाईकोर्ट ने भी इस बात पर नाराजगी जताई कि शिकायतों के बावजूद समस्या का समय रहते समाधान क्यों नहीं किया गया।
प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से पहुंचाया जा रहा पानी
स्थिति को देखते हुए प्रभावित इलाकों में टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें निगरानी और उपचार में जुटी हैं। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने की व्यवस्था भी की गई है। अब जांच का अहम सवाल यह है कि पेयजल स्रोतों में प्रदूषण किस स्तर पर और किस कारण से हुआ तथा इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने और मामले की निगरानी के निर्देश दिए हैं।