अमेरिका की United States Commission on International Religious Freedom (USCIRF) की हालिया सुनवाई को लेकर भारत में राजनीतिक और वैचारिक बहस तेज हो गई है। इस सुनवाई के दौरान भारत के तीन प्रमुख मुख्यमंत्रियों का नाम लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई और प्रतिबंध लगाने की मांग किए जाने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
सुनवाई के दौरान Pushkar Singh Dhami, Yogi Adityanath और Himanta Biswa Sarma का जिक्र किया गया। तीनों नेताओं को हिंदुत्व समर्थक मुख्यमंत्रियों के तौर पर पेश करते हुए उनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की मांग उठाई गई।
बताया जा रहा है कि सुनवाई के दौरान एक्टिविस्ट Raqib Hameed Naik ने हिंदुत्व विचारधारा, राष्ट्रवादी संगठनों और भारत सरकार की कुछ नीतियों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कथित तौर पर इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कई संगठनों का भी उल्लेख किया। इनमें Rashtriya Swayamsevak Sangh, Vishva Hindu Parishad और बजरंग दल जैसे संगठनों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।
इस मुद्दे के सामने आने के बाद भारत में समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग इसे भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं समर्थकों का कहना है कि जिन नेताओं ने अपने राज्यों में धर्मांतरण, अवैध कब्जों, कट्टरपंथ और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर सख्त कार्रवाई की, वही अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निशाने पर लाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर कुछ राजनीतिक और सामाजिक समूह इस सुनवाई को धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में देख रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर भारत सरकार या संबंधित मुख्यमंत्रियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय नेताओं और नीतियों को लेकर होने वाली चर्चाएं आने वाले समय में भारत की आंतरिक राजनीति और वैचारिक विमर्श को और अधिक प्रभावित कर सकती हैं। फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।